शरीर में कहीं भी अचानक गांठ महसूस होना स्वाभाविक रूप से डर पैदा करता है। लेकिन अगर वह गांठ दर्द नहीं करती, तो अधिकतर लोग उसे गंभीरता से नहीं लेते। बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि जब तक दर्द नहीं है, तब तक चिंता की कोई बात नहीं है। यही सोच कई बार खतरनाक साबित हो सकती है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, कई गंभीर बीमारियों—विशेष रूप से कैंसर—की शुरुआत बिना दर्द के ही होती है।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि गांठ क्या होती है, इसके पीछे क्या-क्या कारण हो सकते हैं, कब यह पूरी तरह सामान्य होती है और किन परिस्थितियों में यह कैंसर का संकेत भी हो सकती है। वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से हम यह भी समझेंगे कि कब डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है और जांच में देरी क्यों नहीं करनी चाहिए।
गांठ शरीर में किसी भी असामान्य उभार या सूजन को कहा जाता है। यह त्वचा के ऊपर दिखाई दे सकती है या शरीर के अंदर गहराई में भी हो सकती है। गांठ बनने का कारण केवल कैंसर नहीं होता। कई बार यह सूजन, संक्रमण, हार्मोनल बदलाव, चर्बी के जमाव या तरल पदार्थ के इकट्ठा होने की वजह से भी बनती है।
चिकित्सकीय दृष्टि से गांठ को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बाँटा जाता है। पहली है Benign गांठ , जो गैर-कैंसर होती है और आमतौर पर शरीर को नुकसान नहीं पहुँचाती। दूसरी है Malignant गांठ , जिसे कैंसर कहा जाता है और जो समय के साथ बढ़कर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकती है। समस्या यह है कि केवल छूकर या देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि गांठ benign है या malignant।
इस सवाल का स्पष्ट जवाब है—नहीं। बिना दर्द की हर गांठ कैंसर नहीं होती। वास्तव में, अधिकांश गांठें benign होती हैं। लेकिन यही आधी सच्चाई लोगों को भ्रमित कर देती है। लोग यह मान लेते हैं कि चूँकि अधिकतर गांठें कैंसर नहीं होतीं, इसलिए उनकी गांठ भी सुरक्षित ही होगी।
सच्चाई यह है कि कैंसर की शुरुआती अवस्था में अक्सर कोई दर्द नहीं होता। उदाहरण के लिए, ब्रेस्ट कैंसर, मुंह का कैंसर या लिम्फ नोड से जुड़ा कैंसर—इन सभी में शुरुआती गांठ दर्दरहित हो सकती है। दर्द आमतौर पर तब होता है जब बीमारी आगे बढ़ जाती है या आसपास के टिशू प्रभावित होने लगते हैं।
लिपोमा चर्बी से बनी एक सामान्य गांठ होती है। यह प्रायः गर्दन, कंधे, पीठ या जांघ में पाई जाती है। यह गांठ मुलायम होती है, उंगलियों से दबाने पर आसानी से हिल जाती है और आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ती है। लिपोमा अधिकतर मामलों में पूरी तरह सुरक्षित होती है और केवल तब हटाई जाती है जब वह बहुत बड़ी हो जाए या सौंदर्य या असुविधा का कारण बने।
सिस्ट तरल पदार्थ से भरी गांठ होती है। यह त्वचा, ब्रेस्ट, अंडाशय या शरीर के अन्य हिस्सों में बन सकती है। सिस्ट अक्सर दर्दरहित होती है, लेकिन यदि उसमें संक्रमण हो जाए तो दर्द और सूजन हो सकती है। अधिकांश सिस्ट benign होती हैं और साधारण इलाज से ठीक हो जाती हैं।
कई बार शरीर में संक्रमण के कारण लिम्फ नोड्स सूज जाते हैं। उदाहरण के लिए, गले या दांत के संक्रमण में गर्दन में गांठ बन सकती है। शुरुआत में यह गांठ दर्दरहित हो सकती है और दवाइयों से ठीक भी हो जाती है।
महिलाओं में मासिक धर्म, गर्भावस्था या हार्मोनल असंतुलन के कारण ब्रेस्ट में गांठ महसूस हो सकती है। ऐसी गांठें अक्सर समय के साथ आकार बदलती रहती हैं और ज़्यादातर benign होती हैं।
कुछ विशेष परिस्थितियाँ ऐसी होती हैं, जहाँ बिना दर्द की गांठ को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। यदि गांठ धीरे-धीरे नहीं बल्कि तेज़ी से बढ़ रही हो, बहुत सख्त हो, दबाने पर हिलती न हो, या दो से तीन हफ्तों में अपने आप ठीक न हो रही हो, तो यह चेतावनी संकेत हो सकता है।
उदाहरण के तौर पर, ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती गांठ अक्सर बिना दर्द की होती है। इसी तरह मुंह के कैंसर में लंबे समय तक बना रहने वाला दर्दरहित घाव या गांठ दिखाई दे सकती है। लिम्फोमा में गर्दन या बगल की गांठ सख्त और दर्दरहित होती है। हाथ या पैर में बढ़ती हुई दर्दरहित गांठ सॉफ्ट टिशू सारकोमा का संकेत भी हो सकती है।
बच्चों में गर्दन की गांठ अक्सर संक्रमण के कारण होती है, लेकिन वयस्कों में लंबे समय तक बनी रहने वाली गांठ टीबी या कैंसर से भी जुड़ी हो सकती है।
ब्रेस्ट में बिना दर्द की गांठ को हमेशा गंभीरता से लेना चाहिए, खासकर यदि महिला की उम्र 40 वर्ष से अधिक हो। यह benign भी हो सकती है, लेकिन जांच के बिना निश्चित नहीं कहा जा सकता।
तंबाकू, गुटखा या धूम्रपान करने वालों में मुंह या जीभ की बिना दर्द की गांठ कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकती है।
पेट के अंदर बनने वाली गांठ बाहर से दिखाई नहीं देती, इसलिए यह देर से पकड़ में आती है। यह लिवर, किडनी या आंतों से जुड़ी हो सकती है।
डॉक्टर सबसे पहले मरीज की पूरी जानकारी लेते हैं और गांठ की शारीरिक जांच करते हैं। इसके बाद अल्ट्रासाउंड, मैमोग्राफी, CT Scan या MRI जैसी जांचें करवाई जा सकती हैं। गांठ की प्रकृति समझने के लिए FNAC या बायोप्सी की जाती है। यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि बायोप्सी से कैंसर फैलता नहीं—यह केवल एक मिथक है।
हर गांठ का इलाज अलग होता है। benign गांठों में केवल निगरानी या छोटा ऑपरेशन पर्याप्त होता है। संक्रमण से बनी गांठ दवाइयों से ठीक हो जाती है। यदि गांठ कैंसरस हो, तो बीमारी के स्टेज के अनुसार सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी या इम्यूनोथेरेपी की आवश्यकता पड़ सकती है।
जल्दी पहचान होने पर इलाज सरल, कम खर्चीला और अधिक सफल होता है।
यदि कोई गांठ दो हफ्तों से अधिक समय तक बनी रहे, आकार में बढ़ रही हो, बहुत सख्त हो, या आपके साथ वजन कम होना, थकान या भूख न लगना जैसे लक्षण हों, तो देरी नहीं करनी चाहिए।
अगर आप कानपुर या उसके निकटतम एरिया से हैं तो डॉ युवराज सिंह जो की कैंसर के एक अच्छे और अनुभवी डॉक्टर है, से कंसल्ट कर सकते हैं